NEET UG Paper Leak Case: NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अहम सुनवाई हुई। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत को NTA की प्रश्नपत्र तैयार करने और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने दावा किया कि पूरी प्रक्रिया में कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था है और अंतिम समय तक किसी को यह जानकारी नहीं होती कि कौन-सा प्रश्नपत्र परीक्षा में इस्तेमाल होगा।
मामले की सुनवाई जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ कर रही है। याचिकाकर्ताओं ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए परीक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की मांग की है।
कैसे तैयार होता है NEET का प्रश्नपत्र?
सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। उनके मुताबिक, उदाहरण के तौर पर फिजिक्स के 100 अंकों के प्रश्नपत्र के लिए कई मॉडरेटर से करीब 500 प्रश्नों का प्रश्न बैंक तैयार कराया जाता है।
इसके बाद मॉडरेटरों के दूसरे समूह को इन सवालों में से चयन कर अलग-अलग प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी जाती है। इस प्रक्रिया में चार प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं। इन चार प्रश्नपत्रों में से अंतिम रूप से दो प्रश्नपत्रों का चयन DG NTA द्वारा किया जाता है। मेहता के अनुसार, इस चरण तक भी यह जानकारी सीमित रहती है कि परीक्षा में आखिर कौन-सा प्रश्नपत्र इस्तेमाल किया जाएगा।
सीलबंद बॉक्स और डिजिटल चाबी से होती है प्रिंटिंग
SG ने अदालत को बताया कि चयनित प्रश्नपत्रों को सीलबंद बॉक्स में अलग-अलग प्रिंटिंग प्रेस तक पहुंचाया जाता है। प्रिंटिंग प्रेस में CCTV कैमरों और CISF की निगरानी जैसी सुरक्षा व्यवस्था रहती है।
प्रश्नपत्र को खोलने के लिए डिजिटल चाबी का इस्तेमाल किया जाता है। NTA की ओर से अधिकृत व्यक्ति के प्रिंटिंग प्रेस पहुंचने के बाद प्रेस का मालिक DG NTA को फोन कर इसकी पुष्टि करता है। इसके बाद निर्धारित कोड साझा किया जाता है और सीलबंद सिस्टम को खोला जाता है। प्रिंटिंग की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाती है। मेहता ने यह भी कहा कि प्रिंटर को यह जानकारी नहीं होती कि वह किस परीक्षा का प्रश्नपत्र प्रिंट कर रहा है।
परीक्षा केंद्र तक पहुंचने तक भी सुरक्षा के कई स्तर
केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रश्नपत्र ले जाने वाली गाड़ियों में GPS लगाया जाता है। वाहन की छोटी से छोटी गतिविधि भी ट्रैक और रिकॉर्ड की जा सकती है। परीक्षा केंद्र पर प्रश्नपत्र और OMR शीट सीलबंद लिफाफे में रखे जाते हैं। परीक्षा शुरू होने से पहले सील तोड़कर ही इन्हें खोला जाता है। बताया गया कि प्रत्येक कक्षा में छात्रों की संख्या भी निर्धारित रखी जाती है। इससे परीक्षा केंद्र पर निगरानी और व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलती है।
फिर पेपर लीक कैसे हुआ? कोर्ट ने उठाया बड़ा सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद सामने आई कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए। जजों ने कहा कि सरकार की ओर से बताई जा रही कई व्यवस्थाओं की समीक्षा पहले ही राधाकृष्णन कमिटी कर चुकी है।पीठ ने कहा कि जरूरत केवल मौजूदा सिस्टम की सुरक्षा बताने की नहीं, बल्कि दूरगामी और संस्थागत समाधान तलाशने की है। अदालत ने परीक्षा प्रणाली में लगातार बदलती तकनीक और संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञ अधिकारियों की जरूरत पर भी जोर दिया।
कोर्ट ने UPSC का उदाहरण दिया
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का उदाहरण देते हुए कहा कि उसकी परीक्षा प्रणाली को भी देखा जाना चाहिए। अदालत का कहना था कि NTA को भी ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जिसमें तकनीकी बदलावों और नए जोखिमों के अनुरूप लगातार सुधार किया जा सके। पीठ ने विशेषज्ञ अधिकारियों की नियुक्ति की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था को बदलती तकनीक और उससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों की बेहतर समझ होनी चाहिए।
याचिकाकर्ताओं की क्या मांग है?
NEET-UG 2026 से जुड़ी याचिकाओं में NTA की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि केंद्र सरकार NTA की जगह नई संस्था बनाने या मौजूदा परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह नए सिरे से तैयार करने पर विचार करे। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था तकनीकी रूप से मजबूत, अधिक सुरक्षित और स्वतंत्र होनी चाहिए, ताकि भविष्य में प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं की संभावना को कम किया जा सके।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने NTA की प्रश्नपत्र सुरक्षा व्यवस्था के कई स्तरों को सामने रखा, जिसमें प्रश्न बैंक, सीमित स्तर पर प्रश्नपत्र चयन, सीलबंद बॉक्स, डिजिटल चाबी, CCTV, CISF निगरानी और GPS ट्रैकिंग शामिल हैं। हालांकि, अदालत का जोर केवल सुरक्षा उपायों की जानकारी लेने पर नहीं, बल्कि ऐसा स्थायी और भरोसेमंद परीक्षा तंत्र तैयार करने पर है जो भविष्य की तकनीकी चुनौतियों से भी निपट सके।


