लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार तथा उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह के अभिनंदन समारोह में उन्हें बधाई दी। उन्होंने साहित्यकार के दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए कहा कि समाज और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करने की परंपरा आगे भी जारी रखी जाएगी।
लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के राज्य मुख्यालय के डॉ. राममनोहर लोहिया सभागार में डॉ. उदय प्रताप सिंह के अभिनंदन ग्रंथ के लोकार्पण के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कवि, साहित्यकार, पार्टी नेता और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे।
यश भारती सम्मान को लेकर अखिलेश यादव का बड़ा ऐलान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि जिस तरह समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में कवियों, साहित्यकारों और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया गया, उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भविष्य में यश भारती सम्मान के साथ दी जाने वाली सम्मान राशि को दोगुना किया जाएगा। अखिलेश यादव ने कार्यक्रम में मौजूद कवियों और साहित्यकारों का आभार जताते हुए कहा कि साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मान देना समाज की जिम्मेदारी है।
‘उदय प्रताप मूल रूप से समाजवादी विचारधारा के कवि’
अखिलेश यादव ने डॉ. उदय प्रताप सिंह की साहित्यिक उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी कविताओं की अक्सर चर्चा और उद्धरण किए जाते हैं, लेकिन उनकी मूल पहचान समाजवादी चिंतन से जुड़े कवि के रूप में भी है।
उन्होंने उदय प्रताप सिंह के साथ अपने पुराने संबंधों का उल्लेख करते हुए उनके साहित्यिक योगदान की सराहना की। अखिलेश यादव ने बताया कि उदय प्रताप सिंह ने एक ग्रैमी अवॉर्ड से सम्मानित गीत, जिसमें करीब 150 नामों का उल्लेख था, को हिंदी में रूपांतरित कर पार्टी के लिए ‘गीत मन से मुलायम’ तैयार किया था।
दो बार सांसद और राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं उदय प्रताप
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में उदय प्रताप सिंह के सार्वजनिक जीवन का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उदय प्रताप सिंह मैनपुरी से दो बार सांसद रह चुके हैं और राज्यसभा के सदस्य के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
इसके अलावा वर्ष 1993 में उन्होंने सूरीनाम में आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। साहित्य और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान के लिए उन्हें कई सम्मान भी मिल चुके हैं।
उदय प्रताप सिंह ने जताया आभार
सम्मान समारोह में डॉ. उदय प्रताप सिंह ने आयोजकों और अपने शुभचिंतकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें सूरीनाम में आचार्य की डिग्री के अलावा यश भारती सहित कई सम्मान प्राप्त हुए हैं, लेकिन अपने गृह जनपद मैनपुरी से जुड़े लोगों की ओर से मिला यह सम्मान उनके लिए विशेष महत्व रखता है।
इस मौके पर उन्होंने अपनी हाल ही में लिखी गई एक नई गजल भी प्रस्तुत की, जिसे कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सराहा।
साहित्यकारों ने भी रखे अपने विचार
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि सूर्य कुमार पांडेय ने उदय प्रताप सिंह की बौद्धिक क्षमता और समाजवादी विचारधारा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की प्रशंसा की।
साहित्यकार दीन मोहम्मद दीन और मस्ताना जी समेत अन्य वक्ताओं ने भी उदय प्रताप सिंह को बधाई दी और उनके साहित्यिक योगदान को याद किया।
प्रसिद्ध कवयित्री सरिता शर्मा ने उदय प्रताप सिंह को संत स्वभाव का व्यक्ति बताते हुए कहा कि उनके व्यक्तित्व और अनुभवों से काफी कुछ सीखने को मिलता है। वहीं ‘स्माइलमैन’ के नाम से चर्चित सर्वेश अस्थाना ने कहा कि उन्हें उदय प्रताप सिंह से यह सीख मिली कि नकारात्मक बातों को मन में जगह नहीं देनी चाहिए।
पूर्व आईएएस अधिकारी डीएन लाल ने भी उनके व्यक्तित्व को बहुआयामी बताया।
अभिनंदन ग्रंथ का हुआ लोकार्पण
कार्यक्रम के दौरान मां संतोषी फाउंडेशन, मिश्राना मैनपुरी की ओर से तैयार किए गए ‘डॉ. उदय प्रताप सिंह गुरु जी अभिनंदन ग्रंथ’ का लोकार्पण अखिलेश यादव ने किया।
फाउंडेशन के संस्थापक रहे सत्यसेवक मिश्र और आयोजन से जुड़े बलराम श्रीवास्तव, पंकज मिश्रा, इंजीनियर प्रतोष मिश्रा सहित पूरी टीम ने उदय प्रताप सिंह का अभिनंदन किया।
इसी अवसर पर मां संतोषी फाउंडेशन की ओर से मैनपुरी की सांसद डिंपल यादव को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में कई प्रमुख लोग रहे मौजूद
समारोह में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल के अलावा राजेंद्र चौधरी, अंबिका चौधरी, अरविंद सिंह गोप, प्रोफेसर रमेश दीक्षित, वंदना मिश्रा, चरन सिंह बशर, असीम यादव, मणींद्र मिश्र, दीपक कबीर, मालविका हरिओम, प्रोफेसर लक्ष्मण यादव, श्याम मिश्रा और दीपक रंजन समेत कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में साहित्य, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने डॉ. उदय प्रताप सिंह के लंबे साहित्यिक और सार्वजनिक जीवन की उपलब्धियों को याद किया।
अखिलेश यादव का संदेश
अखिलेश यादव ने कहा कि साहित्यकार और कवि समाज को दिशा देने का काम करते हैं। ऐसे लोगों को सम्मानित करने की परंपरा को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में भी साहित्य, संस्कृति और समाज के लिए उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा।


