उन्नाव: उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के उन्नाव में आयोजित एक कार्यक्रम से राष्ट्रगान के दौरान चले जाने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने वीडियो को लेकर सवाल उठाते हुए इसे राष्ट्रगान के सम्मान से जोड़ दिया है। वहीं कार्यक्रम आयोजकों ने पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि जिस स्थान पर विधानसभा अध्यक्ष को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जा रहा था, वहां राष्ट्रगान नहीं बज रहा था।
यह मामला शनिवार को उन्नाव के पूरन नगर स्थित एसवीएम इंटर कॉलेज में आयोजित उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के 46वें प्रांतीय सम्मेलन से जुड़ा है।
वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस ने साधा निशाना
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सतीश महाना को गार्ड ऑफ ऑनर लेते हुए देखा जा सकता है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इसी दौरान राष्ट्रगान बज रहा था और विधानसभा अध्यक्ष उसके पूरा होने से पहले ही वहां से चले गए।
जिला कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता दिनेश शुक्ला ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस घटना पर सवाल उठाया। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष पर प्रोटोकॉल का सम्मान लेने के बाद राष्ट्रगान के दौरान चले जाने का आरोप लगाते हुए इसे राष्ट्रगान के सम्मान से जोड़कर देखा।
इसके बाद वीडियो को सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शेयर किया और इसको लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
आयोजकों ने बताई अलग स्थिति
विवाद बढ़ने के बाद कार्यक्रम के संयोजक वेणु रंजन भदौरिया ने पूरे घटनाक्रम को लेकर सफाई दी। उनका कहना है कि जिस स्थान पर सतीश महाना को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जा रहा था, वहां राष्ट्रगान नहीं बज रहा था।
आयोजक के मुताबिक, राष्ट्रगान कार्यक्रम स्थल के दूसरे हिस्से में बजाया जा रहा था और उसकी आवाज उस स्थान तक सुनाई दे रही थी जहां गार्ड ऑफ ऑनर दिया जा रहा था। आयोजकों ने इसी आधार पर वायरल वीडियो को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को गलत बताया है।
इस तरह मामले में एक तरफ कांग्रेस नेताओं की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि आयोजकों का कहना है कि घटनाक्रम को सही संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
सम्मेलन में शिक्षा व्यवस्था पर बोले सतीश महाना
विवाद के बीच कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने शिक्षा और संस्थानों की भूमिका पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि देश को मजबूत बनाने के लिए उसके संस्थानों का मजबूत होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं। प्रधानाचार्यों और शिक्षाविदों को अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने और स्वप्रेरणा के साथ शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।
सम्मेलन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से प्रधानाचार्य, शिक्षक और शिक्षाविद शामिल हुए।
शिक्षकों की समस्याओं पर मानसून सत्र में चर्चा का भरोसा
कार्यक्रम के दौरान प्रधानाचार्यों की ओर से चयन वेतनमान, ग्रेच्युटी और अन्य सेवा संबंधी समस्याएं विधानसभा अध्यक्ष के सामने रखी गईं।
सतीश महाना ने भरोसा दिलाया कि शिक्षकों और प्रधानाचार्यों से जुड़े इन मुद्दों को आगामी मानसून सत्र में उचित मंच पर उठाया जाएगा। उन्होंने शिक्षक समुदाय की समस्याओं को गंभीरता से लेने की बात कही।
कार्यक्रम के दौरान ‘शिक्षा प्रभा’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
शिक्षाविदों और शिक्षकों का सम्मान
सम्मेलन में वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार नरेंद्र भदौरिया को ‘उन्नाव गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया। इसके अलावा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई शिक्षकों और शिक्षाविदों को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में सांसद डॉ. साक्षी महाराज ने शिक्षक और प्रधानाचार्य समुदाय को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
उन्होंने कार्यक्रम संयोजक वेणु रंजन भदौरिया के प्रयासों की भी सराहना की।
प्रधानाचार्य परिषद की नई कार्यकारिणी घोषित
सम्मेलन के दौरान उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद की नई कार्यकारिणी की भी घोषणा की गई।
डॉ. संदीप चतुर्वेदी को प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। वहीं डॉ. बृजेश शर्मा, डॉ. मेजर जेपी शर्मा और डॉ. वीरेंद्र चतुर्वेदी को प्रधान संरक्षक तथा प्रधानाचार्य मोहन लाल शुक्ला को संरक्षक बनाया गया।
डॉ. अखिलेन्द्र त्रिपाठी को प्रदेश महामंत्री और डॉ. अमीर सिंह को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई।
राम मंदिर चंदे के मुद्दे पर भी बोले सतीश महाना
कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने राम मंदिर से जुड़े चंदे और चढ़ावे के विवाद पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद हुआ है।
सतीश महाना ने कहा कि मंदिर के लिए दी गई राशि को केवल दान के रूप में नहीं बल्कि भगवान के चरणों में समर्पण के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने से आस्था रखने वाले लोगों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
‘बच्चों को संस्कार के साथ अपनी बात रखने का अधिकार’
‘जेन जी’ से जुड़े सवाल पर सतीश महाना ने कहा कि बच्चों को बेहतर और संस्कारयुक्त शिक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यवस्था को अच्छा या खराब बताने से पहले उससे जुड़े पूरे संदर्भ और परिस्थितियों को समझना जरूरी है।
उनके मुताबिक, बच्चों को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन समाज और सरकार के सामने अपनी समस्याएं रखते समय मर्यादा और संस्कार का ध्यान रखना भी जरूरी है। उन्होंने आपसी संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान निकालने पर जोर दिया।
अब वायरल वीडियो पर सबकी नजर
फिलहाल सतीश महाना से जुड़ा वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप और कार्यक्रम आयोजकों की सफाई ने मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है।
हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर पूरे घटनाक्रम का अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले कार्यक्रम के पूरे क्रम, राष्ट्रगान के वास्तविक स्थान और समय को स्पष्ट करना जरूरी होगा। फिलहाल इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की अलग-अलग दलीलें सामने आ रही हैं।


