प्रयागराज। किराये के मकान में दुर्घटना के कारण हुई मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि केवल किसी संपत्ति का मालिक होने के आधार पर व्यक्ति को दुर्घटना में हुई मौत के लिए आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि मकान मालिक के खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मामला बनाने के लिए अभियोजन पक्ष को प्रथम दृष्टया ऐसी विशिष्ट लापरवाही या चूक दिखानी होगी, जिसका हादसे और मृतक की मौत से सीधा और निकट संबंध हो।

छात्र की मौत से जुड़ा था मामला

यह मामला एक छात्र की मौत से संबंधित था। घटना के बाद किराये के मकान के मालिक अवधेश सिंह के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की गई थी। मामले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आरोपों और उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा की।

अदालत ने पाया कि केवल संपत्ति का मालिक होना अपने आप में आपराधिक लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए अभियोजन को मकान मालिक की ऐसी ठोस चूक या लापरवाही का प्रथम दृष्टया आधार प्रस्तुत करना होगा, जिसका दुर्घटना और मौत के बीच सीधा संबंध स्थापित हो।

संपत्ति का स्वामित्व और आपराधिक लापरवाही अलग

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह महत्वपूर्ण अंतर स्पष्ट किया कि किसी संपत्ति का मालिक होना और आपराधिक लापरवाही करना एक ही बात नहीं है।

यदि किराये के मकान में कोई हादसा होता है और उसमें किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है, तो सिर्फ इस वजह से मकान मालिक के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती कि वह उस संपत्ति का स्वामी है।

मकान मालिक की आपराधिक जिम्मेदारी तभी बन सकती है, जब उसके खिलाफ ऐसी विशिष्ट लापरवाही या चूक का प्रथम दृष्टया आधार मौजूद हो, जिसका दुर्घटना और मौत से प्रत्यक्ष संबंध हो।

अवधेश सिंह के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द

मामले के तथ्यों और आरोपों को देखते हुए जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की पीठ ने मकान मालिक अवधेश सिंह के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

हाईकोर्ट की यह टिप्पणी किराये की संपत्तियों में दुर्घटनाओं से जुड़े आपराधिक मामलों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फैसले का मूल संदेश यह है कि सिर्फ संपत्ति के स्वामित्व के आधार पर किसी व्यक्ति पर आपराधिक दायित्व नहीं डाला जा सकता, जब तक उसकी विशिष्ट लापरवाही या चूक का प्रथम दृष्टया आधार सामने न हो।