Varanasi News: आगामी वाराणसी खंड स्नातक MLC चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में वाराणसी में आयोजित अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, उत्तर प्रदेश पूर्वी की क्षेत्रीय बैठक में पूर्वांचल के आठ जिलों से आए समाज के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने स्नातक MLC प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा के समर्थन का प्रस्ताव पारित किया।
बैठक में आगामी चुनाव में आशुतोष सिन्हा को रिकॉर्ड मतों से विजयी बनाने का संकल्प लिया गया।
पूर्वांचल के 8 जिलों के प्रतिनिधि हुए शामिल
कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व IPS अधिकारी उमेश श्रीवास्तव ने की, जबकि संचालन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आरुणि चंद्र सिन्हा ने किया।
बैठक में समाज के लोगों ने एकजुट होकर आशुतोष सिन्हा के समर्थन का निर्णय लिया। आशुतोष सिन्हा ने इसे केवल राजनीतिक समर्थन नहीं, बल्कि समाज के विश्वास और आशीर्वाद का प्रतीक बताया।
बोले- समाज के सम्मान की लड़ाई जारी रहेगी
आशुतोष सिन्हा ने कहा कि वह कायस्थ समाज से जुड़े मुद्दों और समाज के महापुरुषों के सम्मान के लिए लगातार आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों की उपेक्षा या समाज के अधिकारों से जुड़े किसी भी मुद्दे पर जरूरत पड़ने पर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि समाज की एकजुटता किसी भी संघर्ष को मजबूती देती है और युवाओं को अपने इतिहास तथा महापुरुषों के योगदान से परिचित कराना आवश्यक है।
JPNIC और ऐतिहासिक धरोहरों का उठाया मुद्दा
अपने संबोधन में आशुतोष सिन्हा ने लखनऊ स्थित जेपीएनआईसी को निजी हाथों में दिए जाने के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान बनी ऐतिहासिक और सार्वजनिक महत्व की संस्थाओं एवं धरोहरों के संरक्षण को लेकर आवाज उठाई जाती रहेगी।
लाल बहादुर शास्त्री के आवास के सुंदरीकरण का किया जिक्र
आशुतोष सिन्हा ने वाराणसी के रामनगर स्थित भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री के आवास के सुंदरीकरण से जुड़े कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महापुरुषों से जुड़ी स्मृतियों और स्थलों का संरक्षण केवल विकास कार्य नहीं बल्कि उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का माध्यम है।
स्वामी विवेकानंद से जुड़े स्थल को राष्ट्रीय स्मारक बनाने का संकल्प
उन्होंने वाराणसी के गोपाल लाल क्षेत्र स्थित उस ऐतिहासिक स्थल को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दिलाने के लिए संघर्ष करने की बात कही, जहां स्वामी विवेकानंद ने अपने जीवन के 39 दिन बिताए थे।
आशुतोष सिन्हा ने कहा कि जो समाज अपने इतिहास और महापुरुषों के योगदान को याद रखता है, वह हमेशा मजबूत रहता है। उन्होंने समाज के लोगों द्वारा मिले समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह विश्वास उनके लिए सम्मान के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है।


