हिमाचल प्रदेश की मंडी संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व कर रहीं सांसद कंगना रनौत ने विकास परियोजनाओं में हो रही देरी को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को आड़े हाथों लिया है। मीडियाकर्मियों से चर्चा करते हुए उन्होंने खुलासा किया कि करीब 11 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया जा चुका है, फिर भी धरातल पर एक भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

प्रशासनिक ढिलाई से छवि पर पड़ रहा विपरीत असर

सांसद ने खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि सरकारी तंत्र की इस सुस्ती का खामियाजा उन्हें जनता के बीच भुगतना पड़ रहा है, जिससे उनकी सामाजिक साख को नुकसान पहुंच रहा है। जमीनी स्तर पर काम न दिखने के कारण क्षेत्र में उनके खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाया जा रहा है। स्थिति यह हो गई है कि लोग इस असफलता को लेकर अब इंटरनेट मीडिया पर भी वीडियो और रील्स बनाकर विरोध दर्ज करा रहे हैं।

अधिकारियों की इस बेरुखी से क्षुब्ध होकर सांसद ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “इतनी निठल्ली और निकृष्ट व्यवस्था क्या बोलूं?” उन्होंने प्रशासनिक अमले को सख्त निर्देश दिए कि स्वीकृत धनराशि का शीघ्र इस्तेमाल कर सभी लंबित पड़े कामों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।

मामले के मुख्य बिंदु

  • 11 करोड़ रुपये की राशि मंजूर होने के बावजूद एक भी काम पूरा नहीं हुआ।
  • विकास कार्यों की सुस्ती से जनप्रतिनिधि की साख पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
  • स्थानीय लोग धरातल पर काम न दिखने की वजह से सोशल मीडिया पर रील्स बना रहे हैं।
  • सांसद ने व्यवस्था पर प्रहार करते हुए कहा, “इतनी निठल्ली और निकृष्ट व्यवस्था क्या बोलूं?”

अफ़सरशाही पर खड़े हुए गंभीर सवाल

जनप्रतिनिधि के इस कड़े रुख के बाद स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली और विकास कोष के उपयोग पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब हर तरफ यही चर्चा छिड़ी है कि भारी-भरकम धनराशि की उपलब्धता के बाद भी प्रस्तावित योजनाएं आखिर किस स्तर पर अटकी हुई हैं।

कुल मिलाकर, इस घटनाक्रम ने मंडी क्षेत्र में विकास की सुस्त रफ्तार और प्रशासनिक ढुलमुल रवैये को उजागर कर दिया है। अब यह देखना होगा कि सांसद की इस चेतावनी के बाद अफसरशाही हरकत में आती है या विकास कार्य यूं ही अधर में लटके रहते हैं।