लखनऊ: नोएडा में मजदूर आंदोलन से जुड़े मामले में छात्रा आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत रद्द करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। हाईकोर्ट ने हिरासत को मनमाना करार देते हुए आकृति को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। साथ ही यह राशि संबंधित अधिकारियों के वेतन से वसूलने का निर्देश दिया गया था।

बुधवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ को बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल कर रही है।

अप्रैल में मजदूर प्रदर्शन के दौरान हुई थी गिरफ्तारी

यह मामला अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों की ओर से मजदूरों के अधिकारों और वेतन बढ़ाने समेत कई मांगें उठाई गई थीं।

इसी दौरान पुलिस ने 25 वर्षीय आकृति चौधरी को गिरफ्तार किया था। बाद में जिला प्रशासन ने उन पर प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए NSA के तहत कार्रवाई की थी।

हाईकोर्ट ने हिरासत को बताया था मनमाना

आकृति चौधरी ने NSA के तहत अपनी हिरासत को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि रिकॉर्ड पर ऐसे पर्याप्त ठोस साक्ष्य नहीं हैं, जिनसे प्रथम दृष्टया यह साबित हो कि आकृति ने लोगों को हिंसा के लिए उकसाया था।

अदालत के समक्ष यह भी सवाल उठा कि प्रशासन की ओर से कथित हिंसा भड़काने के आरोप के समर्थन में व्हाट्सऐप चैट, वीडियो या अन्य ठोस सामग्री पर्याप्त रूप से पेश नहीं की गई।

शांतिपूर्ण विरोध संवैधानिक अधिकार का हिस्सा

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने कहा था कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना और अपनी मांगों को सामने रखना संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का हिस्सा है।

हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी की NSA हिरासत को रद्द करते हुए उन्हें 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। कोर्ट ने इस रकम की वसूली गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से करने का निर्देश दिया था।

अधिकारियों के वेतन से वसूली पर सरकार को आपत्ति

उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी थी। सरकार के अनुसार, जिलाधिकारी ने पुलिस की रिपोर्ट और मौके की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए NSA के तहत कार्रवाई का निर्णय लिया था।

सरकार हाईकोर्ट के हिरासत रद्द करने के फैसले को ही नहीं, बल्कि अधिकारियों के व्यक्तिगत वेतन से 5 लाख रुपये की वसूली के निर्देश को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट में अब होगी अहम सुनवाई

अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद यह महत्वपूर्ण होगा कि शीर्ष अदालत हाईकोर्ट के NSA हिरासत रद्द करने के फैसले और अधिकारियों के वेतन से मुआवजा वसूलने के निर्देश को बरकरार रखती है या इसमें कोई बदलाव करती है।

नोट: इस खबर में सरकार और अदालत के समक्ष रखे गए पक्षों का उल्लेख किया गया है। मामले में अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद स्पष्ट होगा।