लखनऊ: सरकारी स्कूल की बदहाल व्यवस्थाओं को अपनी रिपोर्ट के जरिए सामने लाने वाले पत्रकार अमित यादव को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर आगे की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रथम दृष्टया एफआईआर की कार्रवाई को प्रतिशोधात्मक नजरिए से प्रेरित बताया और टिप्पणी की कि व्यवस्था की कमियों को उजागर करने वाले पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई करना 'किलिंग द मैसेंजर' जैसा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने अमित यादव की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
स्कूल की बदहाल व्यवस्था पर की थी रिपोर्टिंग
याचिका पर सुनवाई के दौरान बताया गया कि पत्रकार अमित यादव गोसाईंगंज के पूर्व माध्यमिक विद्यालय, बेगरिया मऊ में रिपोर्टिंग के लिए गए थे।
रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने स्कूल के शौचालयों की खराब स्थिति और विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त पेयजल व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा उठाया। इसके अलावा कुछ शिक्षकों से बातचीत कर स्कूल की व्यवस्थाओं से संबंधित रिपोर्ट तैयार की गई थी।
रिपोर्ट के चार दिन बाद दर्ज हुई FIR
अदालत को बताया गया कि रिपोर्टिंग के करीब चार दिन बाद 24 अगस्त को अमित यादव के खिलाफ गोसाईंगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई।
उनके खिलाफ बीएनएस की धारा 223, 353 और 356 के तहत मामला दर्ज किया गया था। पत्रकार की ओर से एफआईआर को चुनौती देते हुए कहा गया कि यह कार्रवाई उनकी रिपोर्टिंग के बाद की गई।
स्कूल की मौजूदा स्थिति की तस्वीरें मांगी
मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा विभाग को व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने संबंधित स्कूल की वर्तमान स्थिति और परिसर की तस्वीरें भी पेश करने को कहा है। इसके जरिए कोर्ट यह देखना चाहता है कि पत्रकार की रिपोर्ट में उठाए गए स्कूल की व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दों की वास्तविक स्थिति क्या थी।
'किलिंग द मैसेंजर' टिप्पणी से कार्रवाई पर सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रथम दृष्टया पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई के रूप में देखा। अदालत ने कहा कि व्यवस्था की खामियों को सामने लाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करना 'किलिंग द मैसेंजर' जैसा है।
फिलहाल हाईकोर्ट ने एफआईआर के आधार पर पत्रकार अमित यादव के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। स्कूल की वर्तमान स्थिति और बेसिक शिक्षा विभाग का पक्ष सामने आने के बाद मामले में आगे सुनवाई होगी।
नोट: एफआईआर और कार्रवाई को लेकर पत्रकार की ओर से लगाए गए आरोपों तथा अदालत की प्रथम दृष्टया टिप्पणियों का उल्लेख किया गया है। मामले में अंतिम निर्णय आगे की न्यायिक कार्यवाही के बाद होगा।


