नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में स्वदेशी उत्पादों, जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ की बढ़ती भावना की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय उत्पाद अब देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने बताया कि त्योहारों के मौसम में लोगों ने स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने बिहार के पूर्णिया के मखाने के ग्रीस तक पहुंचने और कर्नाटक की अरहर दाल के मालदीव निर्यात होने का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ रही है। यह देश के स्थानीय उत्पादकों और किसानों के लिए उत्साहजनक है।
12 साल से ‘लोकशक्ति की आराधना’ का माध्यम है मन की बात
पीएम मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ की शुरुआत 12 साल पहले विजयादशमी के अवसर पर हुई थी। समय के साथ यह कार्यक्रम देश के लोगों के विचारों, उपलब्धियों और प्रेरणादायक प्रयासों को सामने लाने का माध्यम बन गया है। उन्होंने इसे ‘लोकशक्ति की आराधना’ बताते हुए जनता की भागीदारी और सामूहिक प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया।
सूखती हेवल नदी को पुनर्जीवित करने के प्रयासों की सराहना
जल संरक्षण के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल की हेवल नदी का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि नदी के सूखने की समस्या से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर प्रयास किए। इस तरह के सामूहिक प्रयास जल स्रोतों को बचाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जैविक खेती को बढ़ावा देने पर दिया जोर
प्रधानमंत्री ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में ‘खेती विरासत मिशन’ के प्रयासों की भी सराहना की। इस मिशन के माध्यम से जैविक खेती और प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने के लिए काम किया जा रहा है। प्राकृतिक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहन देने में मदद मिल सकती है।
प्रधानमंत्री के संबोधन में स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने, प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने और समाज की भागीदारी से सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश प्रमुख रहा।