लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सरकार ने नई योजना पर काम शुरू किया है। प्रदेशभर में कराई गई सर्वे और मैपिंग में 15,438 आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे मिले हैं, जो स्कूलों से 200 मीटर के दायरे में संचालित हो रहे हैं। अब इन केंद्रों को संबंधित स्कूल परिसरों में स्थानांतरित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।

प्रदेश में फिलहाल 1,89,280 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। सरकार की इस कवायद का उद्देश्य आंगनबाड़ी से जुड़े छोटे बच्चों को शुरुआती शिक्षा के साथ स्कूल के बेहतर माहौल और वहां उपलब्ध सुविधाओं से जोड़ना है।

बदायूं में सबसे ज्यादा केंद्र स्कूलों के करीब

मैपिंग के दौरान जिलावार स्थिति में काफी अंतर सामने आया है। बदायूं में 713 आंगनबाड़ी केंद्र स्कूलों से 200 मीटर के दायरे में मिले हैं, जो प्रदेश में सबसे अधिक हैं।

इसके अलावा पीलीभीत में 274, लखीमपुर खीरी में 218, बरेली में 211 और शाहजहांपुर में 119 आंगनबाड़ी केंद्र स्कूलों के नजदीक पाए गए हैं। वहीं कुछ जिलों में ऐसे केंद्रों की संख्या बेहद कम रही। बुलंदशहर में 200 मीटर के दायरे में एक भी आंगनबाड़ी केंद्र दर्ज नहीं किया गया।

स्कूल परिसर में आने से मिल सकती हैं बेहतर सुविधाएं

सरकार का मानना है कि स्कूल परिसरों के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों को जोड़ने से बच्चों को शुरुआती शिक्षा के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है। साथ ही स्कूलों में मौजूद बुनियादी सुविधाओं का इस्तेमाल भी आंगनबाड़ी से जुड़े बच्चों के लिए किया जा सकेगा।

इस योजना के जरिए आंगनबाड़ी व्यवस्था और प्राथमिक शिक्षा के बीच बेहतर समन्वय बनाने के साथ बच्चों के शुरुआती विकास को मजबूत करने पर जोर है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का बढ़ा मानदेय

आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था में बदलाव की तैयारी के साथ सरकार ने कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में भी बढ़ोतरी की है।

अयोध्या में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 8 हजार रुपये से बढ़ाकर 12 हजार रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की। वहीं सहायिकाओं का मानदेय 4 हजार से बढ़ाकर 6 हजार रुपये प्रति माह किया गया है।

हर साल 5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा के मोर्चे पर भी राहत दी गई है। उन्हें हर वर्ष 5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

इसके अलावा सरकार की ओर से हर साल दी जाने वाली साड़ियों की संख्या में भी बढ़ोतरी की गई है।

बच्चों के साथ कार्यकर्ताओं की सुविधाओं पर भी फोकस

सरकार की इस पूरी कवायद में एक ओर आंगनबाड़ी केंद्रों को स्कूलों के करीब लाकर बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय तथा स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

आने वाले समय में स्कूलों के नजदीक पाए गए आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर सरकार की अंतिम योजना और स्थानांतरण की प्रक्रिया किस तरह लागू होती है, इस पर नजर रहेगी।