लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने विभिन्न सरकारी विभागों में आउटसोर्स के जरिए कार्यरत कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पात्र कर्मचारियों को बीमारी, इलाज, मातृत्व अवकाश, अंतिम संस्कार सहायता और पेंशन जैसी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। साथ ही वेतन भुगतान और EPF-ESIC अंशदान को समय पर सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।

गंभीर बीमारी पर 78 दिन तक सवैतनिक अवकाश

नई व्यवस्था में गंभीर बीमारी से जूझने वाले पात्र आउटसोर्स कर्मचारियों को ESIC के माध्यम से अधिकतम 78 दिनों तक सवैतनिक अवकाश देने का प्रावधान किया गया है। इससे इलाज के दौरान कर्मचारियों को आय में कमी की चिंता से कुछ राहत मिल सकेगी।

महिला कर्मचारियों को 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश

आउटसोर्स व्यवस्था के तहत काम करने वाली महिला कर्मचारियों के लिए भी अहम सुविधा प्रस्तावित है। मातृत्व की स्थिति में उन्हें 26 सप्ताह यानी लगभग छह महीने का सवैतनिक अवकाश दिया जाएगा। यह लाभ अधिकतम दो बच्चों के जन्म तक लागू रहेगा।

इससे मातृत्व के दौरान महिलाओं को नौकरी के साथ आर्थिक सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

परिवार को भी मिलेगी इलाज की सुविधा

सामाजिक सुरक्षा का दायरा कर्मचारी तक सीमित नहीं रहेगा। पात्र आउटसोर्स कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों को भी ESIC के तहत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।

ESIC अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के साथ योजना से जुड़े निजी मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पतालों में भी इलाज कराया जा सकेगा। गंभीर बीमारियों में ऑपरेशन और आवश्यक विशेष जांच जैसी सुविधाओं को भी इसमें शामिल किया गया है।

कर्मचारी की मृत्यु पर 15 हजार रुपये की सहायता

ड्यूटी या सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को अंतिम संस्कार के लिए 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान भी रखा गया है।

वहीं EPF के माध्यम से लंबे समय तक सेवा करने वाले कर्मचारियों के लिए पेंशन का प्रावधान भी है। 10 वर्ष की सेवा पूरी करने पर पेंशन की पात्रता बन सकती है। यह पेंशन 1,000 रुपये से शुरू होकर अधिकतम 7,500 रुपये तक होने का उल्लेख किया गया है।

हर महीने 5 तारीख तक वेतन देने पर जोर

आउटसोर्स कर्मचारियों के पारिश्रमिक भुगतान के लिए भी समयसीमा निर्धारित की गई है। व्यवस्था के अनुसार कर्मचारियों को हर महीने की 5 तारीख तक भुगतान किया जाना है।

इसके अलावा कर्मचारियों के EPF और ESIC अंशदान को समय से जमा कराने की निगरानी की जाएगी, ताकि सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभों में देरी न हो।

भर्ती प्रक्रिया में भी तय होंगे नियम

आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती को लेकर भी प्रक्रिया निर्धारित की गई है। संबंधित एजेंसियों को सेवायोजन पोर्टल पर पंजीकृत अभ्यर्थियों में से ही उम्मीदवारों का चयन करना होगा।

चयन के लिए 100 अंकों की परीक्षा का प्रावधान रहेगा। संबंधित जिले के निवासी अभ्यर्थियों को स्थानीय निवासी होने के आधार पर 15 अतिरिक्त अंक दिए जाने की व्यवस्था बताई गई है। इसके साथ ही भर्ती में आरक्षण से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

आउटसोर्स कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने की कवायद

सरकार की इस पहल का उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों को केवल पारिश्रमिक पर निर्भर श्रमिकों के रूप में न रखते हुए उन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं, सवैतनिक अवकाश, मातृत्व लाभ, EPF और पेंशन सहित व्यापक सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना है। इससे बड़ी संख्या में सरकारी विभागों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों को दीर्घकालिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।