लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने महर्षि यूनिवर्सिटी, लखनऊ के सातवें दीक्षोत्सव को संबोधित करते हुए उपाधि एवं पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने विद्यार्थियों से शोध, नवाचार और रचनात्मकता के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के हित में करना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखना चाहिए और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर अत्यधिक निर्भर होने के बजाय अपनी बुद्धिमत्ता, विवेक और रचनात्मक सोच का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान का उपयोग किसी को भ्रमित करने के लिए नहीं, बल्कि समाज और देश के विकास के लिए करेंगे। सकारात्मक सोच के साथ परिवार, समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए कार्य करना ही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य है।
माता-पिता का सम्मान और सेवा भी शिक्षा का महत्वपूर्ण संस्कार
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को माता-पिता के सम्मान और सेवा का महत्व समझाते हुए कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर देते हैं। ऐसे में बच्चों का दायित्व है कि वे अपने माता-पिता का सम्मान करें, उनकी सेवा करें और वृद्धावस्था में उनका सहारा बनें। उन्होंने परिवार में आपसी सहयोग, सम्मान और संवेदनशीलता की भावना बनाए रखने पर भी जोर दिया।
अपने पूर्व अनुभवों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने महिलाओं को आर्थिक सहायता, संपत्ति में स्वामित्व और आवास संबंधी योजनाओं के माध्यम से सशक्त बनाने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनमें आत्मविश्वास विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।
भारत की प्रगति में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण
राज्यपाल ने कहा कि भारत विकास के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर आगे बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर देश की भूमिका मजबूत हो रही है। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ नागरिकों का योगदान भी राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी प्रतिभा और कौशल को पहचानने तथा उनका उपयोग देशहित में करने की अपील की।
राष्ट्रीय सुरक्षा का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीनों सेनाओं की क्षमताओं को मजबूत करने के प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए इसे भारत की सामरिक क्षमता और समन्वय का उदाहरण बताया। गुजरात में शिक्षा मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के निर्माण में सहयोग देने के अपने अनुभव भी साझा किए।
राज्यपाल ने युवाओं से चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ करने तथा देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान देने का आह्वान किया।
पोषण, सेवा और सामाजिक सरोकारों पर दिया जोर

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने समाजसेवा से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि गुजरात में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अतिथियों से बुके के स्थान पर पोषण सामग्री लाने का आग्रह किया था, जिसे आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों में वितरित किया जाता था। उन्होंने जन भवन में आने वाले अतिथियों से गायों और बछड़ों के लिए आटा तथा गुड़ लाने की परंपरा का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों से बच्चों में सेवा, करुणा और अच्छे संस्कार विकसित होते हैं। राज्यपाल ने महर्षि यूनिवर्सिटी द्वारा जन भवन स्थित आदर्श माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए 400 टी-शर्ट उपलब्ध कराने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने वंचित परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों के अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रदेश के विश्वविद्यालयों में शिक्षा और शोध की गुणवत्ता पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 19 राज्य विश्वविद्यालयों ने नैक मूल्यांकन में ए-प्लस और ए-प्लस-प्लस ग्रेड प्राप्त किए हैं। विश्वविद्यालयों की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में भागीदारी को भी उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे प्रयासों से जोड़ा।
उन्होंने शोध एवं अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और उच्च शिक्षा को अधिक प्रभावी एवं रोजगारोन्मुख बनाने की आवश्यकता बताई। राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों के शोध का लाभ समाज और देश को मिलना चाहिए। शोध कार्य देश की आवश्यकताओं के अनुरूप होने चाहिए, जिससे विकास की नई संभावनाएं पैदा हों।
200 गांवों में शिक्षा, स्वच्छता और पोषण से जुड़े कार्यक्रम
राज्यपाल ने बताया कि प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालय पांच-पांच गांव गोद लेकर शिक्षा, स्वच्छता और पोषण से संबंधित गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह कार्यक्रम लगभग 200 गांवों में चलाया जा रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण की जानकारी देते हुए कहा कि पिछले छह वर्षों में जनसहयोग से लगभग 75 हजार आंगनवाड़ी केंद्रों को निर्धारित संसाधनों के आधार पर बेहतर बनाया गया है। इस कार्य पर करीब 180 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इन केंद्रों के माध्यम से बच्चों को शिक्षा, संस्कार और विभिन्न गतिविधियों से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बेटियों की सुरक्षा और बच्चों के संरक्षण पर विशेष जोर
राज्यपाल ने बेटियों के सम्मान और सुरक्षा को समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि उनकी शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करना जरूरी है। उन्होंने बाल गृहों में रह रही बच्चियों की स्थिति का उल्लेख करते हुए बच्चों के साथ होने वाले उत्पीड़न और अन्याय के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही।
उन्होंने यह भी बताया कि कुछ बच्चियां ऐसी परिस्थितियों में बाल गृहों में रह रही हैं, जहां उनके माता-पिता जेल में हैं। ऐसे बच्चों के प्रति समाज को संवेदनशील रहने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

राज्यपाल ने जानकारी दी कि प्रदेश के 12 जिलों में पॉक्सो अधिनियम से संबंधित मामलों के पीड़ित बच्चों को शिक्षा, संस्कार और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए जन भवन की ओर से विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। बच्चों को धार्मिक स्थलों के दर्शन और मनोरंजक गतिविधियों के अवसर भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि उनके सर्वांगीण विकास में मदद मिल सके।
विद्यार्थियों की नवाचार परियोजनाओं का किया अवलोकन
दीक्षोत्सव के दौरान राज्यपाल ने महर्षि यूनिवर्सिटी में आयोजित विद्यार्थी परियोजना प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसमें विद्यार्थियों ने इंजीनियरिंग, हार्डवेयर, डिजिटल संचार, मीडिया, एनिमेशन, वैदिक विज्ञान, चेतना के विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उद्यमिता से संबंधित परियोजनाएं प्रस्तुत कीं।
प्रदर्शनी में विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के लिए विकसित सुरक्षित आंतरिक संचार मंच ‘महर्षि कनेक्ट’, सुरक्षा संबंधी परियोजना ‘सुरक्षा नेर’, औद्योगिक भ्रमण में समन्वय स्थापित करने वाला डिजिटल मंच ‘विजिटब्रिज’ और शैक्षिक रोबोट ‘ऋषि’ प्रमुख आकर्षण रहे।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से उनकी परियोजनाओं के उद्देश्य, कार्यप्रणाली और व्यावहारिक उपयोगिता के बारे में जानकारी ली। उन्होंने नवाचारों को समाजोपयोगी बनाने, शोध को आगे बढ़ाने और उद्यमिता के क्षेत्र में नए अवसर तलाशने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।
शोध और नवाचार से विकसित भारत का सपना होगा साकार
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि व्यावहारिक प्रयोगों और शोध पर भी ध्यान देना चाहिए। बिजली गिरने से होने वाली मौतों को रोकने, सुनामी और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने तथा अंतरिक्ष के क्षेत्र में अनुसंधान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य में विज्ञान और तकनीक की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी।
उन्होंने कहा कि सरकार शोध के क्षेत्र में निरंतर प्रयास कर रही है और विद्यार्थियों को इन अवसरों का उपयोग करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। युवाओं के पास ज्ञान, कौशल और मेहनत करने की क्षमता है। जरूरत है कि वे अपनी प्रतिभा को सही दिशा दें और देश की आवश्यकताओं के अनुरूप काम करें।
अपने संबोधन के अंत में राज्यपाल ने युवाओं से वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ कार्य करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना, समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और सभी को साथ लेकर चलना राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राज्यपाल का संदेश स्पष्ट रहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, नवाचार और सामाजिक जिम्मेदारी के माध्यम से देश के विकास में योगदान देना है।