इजरायल। इजरायल की राजनीति में चुनावी मुकाबले को लेकर हलचल तेज है। बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन और विपक्षी खेमे के बीच कड़ी टक्कर के संकेत मिल रहे हैं। सामने आए एग्जिट पोल के अनुमानों के मुताबिक, नेतन्याहू के गठबंधन को 59 सीटें, जबकि गादी आइजनकोट के खेमे को 49 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। हालांकि, इन अनुमानों के आधार पर अंतिम चुनावी नतीजों या सरकार गठन की स्थिति तय नहीं मानी जा सकती।

इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। ऐसे में यदि एग्जिट पोल के अनुमान सही साबित होते हैं, तो नेतन्याहू के गठबंधन को बहुमत हासिल करने के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना पड़ सकता है।

नेतन्याहू के सामने विपक्ष की चुनौती

बेंजामिन नेतन्याहू के सामने पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट समेत कई विपक्षी नेताओं की चुनौती बताई जा रही है। चुनावी मुकाबले में राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य रणनीति और देश की राजनीतिक दिशा प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। गठबंधन की स्थिति और छोटे राजनीतिक दलों की भूमिका सरकार गठन में अहम साबित हो सकती है।

गाजा युद्ध और सुरक्षा बने प्रमुख चुनावी मुद्दे

7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद गाजा में युद्ध तथा लेबनान और ईरान से जुड़े संघर्षों ने इजरायल की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया है। चुनाव में गाजा युद्ध, हमास के खिलाफ कार्रवाई, देश की सुरक्षा, सैन्य सेवा और न्यायिक सुधार जैसे मुद्दों पर मतदाताओं की राय महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मतदान को लेकर रिकॉर्ड भागीदारी के दावों के बीच अब सबकी नजरें आधिकारिक नतीजों पर टिकी हैं। हालांकि, मतदान और एग्जिट पोल से जुड़ी इन खबरों की स्वतंत्र पुष्टि तथा चुनाव की तारीख और आधिकारिक परिणामों की पुष्टि जरूरी है। एग्जिट पोल केवल अनुमान होते हैं, अंतिम नतीजे नहीं।

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