सोनीपत/नागोया। जापान के आइची-नागोया में आयोजित पैरा एशियाई खेलों में हरियाणा के पैरा एथलीट सुमित अंतिल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतने की खबर से देश को गौरवान्वित किया है। सोनीपत जिले के खेवड़ा गांव के रहने वाले सुमित ने भाला फेंक स्पर्धा में 72.46 मीटर की दूरी दर्ज की। उनकी इस उपलब्धि से गांव में खुशी की लहर दौड़ गई और खेल प्रेमियों ने उन्हें बधाई दी।

सुमित की सफलता सिर्फ एक पदक की कहानी नहीं है, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों के सामने हार न मानने और लगातार मेहनत करते रहने की प्रेरणादायक मिसाल भी है।

हादसे में गंवाया पैर, फिर भी नहीं मानी हार

सुमित अंतिल का जीवन बचपन से ही संघर्षों से भरा रहा। सात वर्ष की उम्र में उनके पिता रामकुमार का बीमारी के कारण निधन हो गया था। इसके बाद उनकी मां निर्मला देवी ने चार बच्चों की परवरिश की और परिवार को संभाला।

5 जनवरी 2015 को सुमित के जीवन में एक बड़ा हादसा हुआ। उस समय वह 12वीं कक्षा में पढ़ते थे और कॉमर्स की ट्यूशन लेकर बाइक से घर लौट रहे थे। इसी दौरान सीमेंट के कट्टों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में उन्हें अपना एक पैर गंवाना पड़ा।

परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय था, लेकिन सुमित ने हिम्मत नहीं छोड़ी। वर्ष 2016 में उन्हें कृत्रिम पैर लगाया गया। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे खुद को संभाला और जिंदगी में आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

मां से किया वादा, मेहनत से कर दिखाया सच

सुमित की मां निर्मला देवी ने बेटे के संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि हादसे के बाद परिवार काफी दुखी था। लेकिन सुमित ने अपनी मां को हिम्मत देते हुए भरोसा दिलाया कि वह उन्हें जीवन में खुशियां देकर दिखाएगा।

उनके इस जज्बे ने परिवार को मुश्किल दौर में संबल दिया। आज सुमित की उपलब्धियां उनकी मेहनत, आत्मविश्वास और परिवार के सहयोग की कहानी बयां करती हैं।

कुश्ती से शुरू हुआ सफर, भाला फेंक में बनाई पहचान

हादसे के बाद सुमित ने खेलों की ओर रुख किया। शुरुआत में उन्होंने कुश्ती में हाथ आजमाया, लेकिन बाद में भाला फेंक को अपना लक्ष्य बनाया। कोच वीरेंद्र धनखड़ के मार्गदर्शन में उन्होंने प्रशिक्षण शुरू किया और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए लगातार मेहनत की।

उनकी लगन और अभ्यास ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। सुमित ने साबित किया कि मजबूत इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन से कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।

पैरालिंपिक में भी देश को दिला चुके हैं गोल्ड

सुमित अंतिल भारत के सबसे सफल पैरा भाला फेंक खिलाड़ियों में शामिल हैं। वह टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 पैरालिंपिक में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। वर्ष 2023 के एशियाई पैरा खेलों में भी उन्होंने 73.29 मीटर के प्रदर्शन के साथ स्वर्ण पदक जीता था।

उनके नाम विश्व रिकॉर्ड भी दर्ज रहे हैं। लगातार बड़े मंचों पर शानदार प्रदर्शन कर सुमित ने भारतीय पैरा खेलों को नई पहचान दिलाने में अहम योगदान दिया है।

खेवड़ा गांव में खुशी का माहौल

सुमित की सफलता की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव खेवड़ा सहित खेल जगत में खुशी का माहौल है। उनकी उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा है कि जीवन में आई कठिनाइयां किसी व्यक्ति की मंजिल तय नहीं करतीं। दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और निरंतर प्रयास से सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है।

सुमित अंतिल की कहानी संघर्ष से शिखर तक पहुंचने की ऐसी मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेगी।