Lucknow News: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया बना दिया’ वाले बयान के बाद समाजवादी पार्टी (SP) और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने बिना किसी नेता या दल का नाम लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए राजनीतिक तंज कसा।

जयंत चौधरी ने कहा कि अगर सियासत की लड़ाई में कुछ सस्ते शब्द बोलने ही थे तो उनका नाम लेकर बोल देते। उन्होंने जाट समाज को टारगेट करने और ‘एबीसीडी हमने सिखाई’ जैसी बातों को अहंकार करार दिया। जयंत ने कहा कि इस तरह का अहंकार वह पहले भी देख चुके हैं।

अखिलेश यादव के बयान से शुरू हुआ विवाद

दरअसल, एक कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने अपने पुराने गठबंधन सहयोगी की ओर इशारा करते हुए कहा था, “न जाने कहां से चले आए थे गठबंधन करने। हमने चवन्नी का रुपया बना दिया, लेकिन तब भी छोड़कर चले गए।”

अखिलेश यादव के इस बयान के बाद रालोद नेताओं की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। दोनों दलों के नेताओं ने पुराने गठबंधन और एक-दूसरे के राजनीतिक योगदान को लेकर बयान और पलटवार शुरू कर दिए।

सपा ने गिनाए अपने ‘एहसान’

विवाद बढ़ने के बाद समाजवादी पार्टी की ओर से कहा गया कि सपा ने जयंत चौधरी को राज्यसभा भेजने में भूमिका निभाई थी। इसके अलावा पार्टी की ओर से चौधरी परिवार के नाम पर एयरपोर्ट और विश्वविद्यालय का नाम रखे जाने का भी जिक्र किया गया।

इसके जवाब में रालोद के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने सपा पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, “मुलायम को मुलायम बनाने वाले चौधरी साहब ही थे।” केसी त्यागी ने समाजवादी पार्टी के पुराने राजनीतिक इतिहास और चौधरी चरण सिंह के योगदान का हवाला देते हुए अपना पक्ष रखा।

जयंत चौधरी ने इशारों में साधा निशाना

गुरुवार को जयंत चौधरी ने खुद सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जाट समाज को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर आपत्ति जताई और राजनीतिक योगदान को लेकर अहंकार दिखाने पर निशाना साधा।

जयंत चौधरी के बयान के बाद सपा और रालोद के बीच पुराने गठबंधन की तल्खियां एक बार फिर सार्वजनिक होती नजर आ रही हैं। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच बढ़ती बयानबाजी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।

2027 चुनाव से पहले बढ़ी सियासी गर्मी

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुटे हैं। ऐसे में सपा और रालोद के बीच गठबंधन, पुराने रिश्तों और राजनीतिक योगदान को लेकर शुरू हुई बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।

अब राजनीतिक गलियारों में दोनों दलों के नेताओं की अगली प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। खास तौर पर यह देखना अहम होगा कि अखिलेश यादव के बयान पर जयंत चौधरी और रालोद की ओर से आगे क्या रुख अपनाया जाता है।