रुपईडीह, गोण्डा। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के सरकारी दावे जमीनी स्तर पर हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। विकासखंड रुपईडीह के ग्राम पंचायत देवतहां में संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिछले करीब डेढ़ साल से बिना चिकित्सक के चल रहा है। अस्पताल की पूरी जिम्मेदारी महज एक फार्मासिस्ट के भरोसे छोड़ दी गई है। इससे क्षेत्रीय लोगों को इलाज के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

तीन दर्जन से अधिक मरीज पहुंच रहे प्रतिदिन

हैरानी की बात यह है कि चिकित्सक और संसाधनों के अभाव के बावजूद अस्पताल में मरीजों की संख्या कम नहीं हो रही है। मौसमी बीमारियों के इस दौर में प्रतिदिन करीब तीन दर्जन से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। दूर-दराज के गांवों से गरीब ग्रामीण सरकारी अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन चिकित्सक न होने के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। मरीजों को केवल फार्मासिस्ट के सहारे दवाइयां लेकर वापस जाना पड़ता है। वहीं गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को जिला अस्पताल अथवा निजी चिकित्सालयों का रुख करना पड़ता है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

ग्राम प्रधान ने जताई नाराजगी, चिकित्सक की तैनाती की मांग

इस मामले को लेकर ग्राम प्रधान अभिनव प्रताप सिंह ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि अस्पताल में चिकित्सक की तैनाती नहीं होने से क्षेत्रीय लोगों को इलाज के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक चिकित्सा प्रत्येक नागरिक का बुनियादी अधिकार है, लेकिन यहां डेढ़ साल से चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी है।

उन्होंने कहा कि प्रतिदिन दर्जनों मरीज अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन चिकित्सक के अभाव में उन्हें समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खरगूपुर के चिकित्साधीक्षक से कई बार चिकित्सक की तैनाती कराने की मांग की गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।

ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवतहां पर जल्द चिकित्सक की तैनाती कराने की मांग की है, ताकि क्षेत्रीय जनता को गांव में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।