नई दिल्ली। देश की राजनीति के अपराधीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट के न्याय मित्र (Amicus Curiae) और वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया की ओर से दाखिल रिपोर्ट के मुताबिक, देश के मौजूदा 776 सांसदों में से 326 यानी करीब 45 फीसदी सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। रिपोर्ट में राजनीति से जुड़े आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे की जरूरत पर जोर दिया गया है। इसमें वर्तमान और पूर्व सांसदों एवं विधायकों से जुड़े कुल 4,192 आपराधिक मामलों के लंबित होने की बात कही गई है।
लोकसभा के 251 और राज्यसभा के 75 सांसदों पर केस
रिपोर्ट के अनुसार, आपराधिक मामलों का सामना कर रहे 326 मौजूदा सांसदों में लोकसभा के 251 और राज्यसभा के 75 सांसद शामिल हैं। इनमें लोकसभा के 170 सांसद और राज्यसभा के 40 सांसद ऐसे हैं, जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन मामलों में पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है।
14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ भी आपराधिक मामले
रिपोर्ट में देश के 28 राज्यों के मौजूदा मुख्यमंत्रियों से संबंधित आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है। इसके मुताबिक 14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी के खिलाफ 89 मामले बताए गए हैं। वहीं राज्यों के आंकड़ों में केरल के 20 में से 19 यानी 95 फीसदी सांसदों और तेलंगाना के करीब 82 फीसदी सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले होने का उल्लेख किया गया है।
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार में भी करीब 50 फीसदी सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
मामलों की रोजाना सुनवाई की मांग
न्याय मित्र विजय हंसारिया ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुझाव दिया है कि सांसदों और विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों में रोजाना कराई जाए। रिपोर्ट में इन मामलों का एक वर्ष के भीतर अंतिम निपटारा सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि राजनीति के अपराधीकरण को रोकने और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी न्यायिक व्यवस्था आवश्यक है।