लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर ठेकों के आवंटन को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में करीब 17 हजार करोड़ रुपये के ठेकों में कथित तौर पर पहले से ही सब कुछ तय कर लिया गया था। अखिलेश यादव ने टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच की मांग उठाई है।
टेंडर प्रक्रिया पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव का आरोप है कि टेंडर की शर्तें तय करने से लेकर टेंडर खुलने तक की प्रक्रिया को कथित रूप से इस तरह संचालित किया गया कि कुछ खास कंपनियों को लाभ मिल सके। उन्होंने उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के ठेकों का उल्लेख करते हुए आवंटन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इन ठेकों में कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रक्रिया को कथित तौर पर मैनेज किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि ठेकों के बदले 5 से 7 प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने की चर्चा है। हालांकि, कमीशनखोरी से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।
नेता-अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
अखिलेश यादव ने ठेकों के आवंटन में कथित अनियमितताओं को लेकर नेताओं और अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि यदि टेंडर प्रक्रिया पहले से तय थी, तो इससे सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा। सपा अध्यक्ष के आरोपों के बाद ठेकों की प्रक्रिया, पात्र कंपनियों के चयन और आवंटन से जुड़े दस्तावेजों की जांच का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है।
आधिकारिक पक्ष और दस्तावेजों की पुष्टि जरूरी
इस मामले में अखिलेश यादव की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित टेंडर दस्तावेजों, निविदा शर्तों, कंपनियों के चयन की प्रक्रिया और भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच आवश्यक है। उपलब्ध जानकारी में यूपीडा या प्रदेश सरकार का विस्तृत आधिकारिक पक्ष शामिल नहीं है।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में है। आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट करने के लिए संबंधित विभाग का जवाब और स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।