इंदौर के गौराकुंड क्षेत्र में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान अचानक सड़क फट गई और तेज दबाव के साथ पानी बाहर निकलने लगा। सड़क पर पानी का तेज बहाव देखकर आसपास मौजूद लोग और वाहन चालक हैरान रह गए। घटना का सीसीटीवी वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
सड़क के बीचों-बीच पानी निकलने से कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिस जगह पाइपलाइन से पानी बाहर निकला, वहां सड़क और आसपास के फुटपाथ को भी नुकसान पहुंचा। घटना के दौरान एक स्कूल बस समेत कई वाहन मौके से गुजर रहे थे। स्थानीय लोगों ने वाहनों को दूसरे हिस्से से निकालकर किसी बड़े हादसे की स्थिति बनने से बचाया।
अफसर बोले- हादसा नहीं, पाइपलाइन की टेस्टिंग सफल
स्मार्ट सिटी के अधिकारियों का कहना है कि पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान पानी अंतिम छोर यानी डेड एंड तक पहुंचा था। वहां लगे एंड कैप पर दबाव बढ़ने से पानी बाहर निकल आया। स्मार्ट सिटी के प्रभारी कार्यपालन यंत्री सौरभ माहेश्वरी ने इसे टेस्टिंग प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा कि अंतिम छोर तक पानी पहुंचना इस बात का संकेत है कि पाइपलाइन की टेस्टिंग सफल रही।
हालांकि, सड़क पर इस तरह पानी फूटने और गड्ढा बनने के बाद स्मार्ट सिटी के काम की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
2021 में शुरू होनी थी सप्लाई, 2023 में पूरा हुआ काम
स्मार्ट सिटी क्षेत्र में 24 घंटे पानी की सप्लाई के लिए करीब 500 और 600 एमएम क्षमता की पाइपलाइन डाली गई थी। योजना के मुताबिक वर्ष 2021-22 में इससे पानी की सप्लाई शुरू होनी थी, लेकिन निर्माण एजेंसी के काम अधूरे छोड़ने के कारण परियोजना में देरी हुई और पाइपलाइन का काम 2022-23 में पूरा किया गया।
इसके बावजूद इलाके में इस पाइपलाइन से नियमित पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी। सोमवार को इसी बंद पड़ी लाइन को चालू करने की दिशा में टेस्टिंग की गई थी। टेस्टिंग के दौरान पाइपलाइन के अंतिम छोर से दबाव के साथ पानी बाहर निकलने लगा और सड़क का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।
कांग्रेस ने साधा निशाना
घटना का वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने भी स्मार्ट सिटी के कामों को लेकर सरकार और नगर निगम पर निशाना साधा। जनकार्य समिति के प्रभारी राजेंद्र राठौर ने आरोप लगाया कि स्मार्ट सिटी के नाम पर करीब ₹1,000 करोड़ के कार्य हुए हैं, जिनकी गुणवत्ता और खर्च की जांच होनी चाहिए।
राठौर का कहना है कि अगर अधिकारियों और एजेंसी को पहले से पता था कि टेस्टिंग के दौरान पानी अंतिम छोर से बाहर निकल सकता है तो मौके पर ट्रैफिक डायवर्जन और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए। उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए जांच की मांग की है।
दो अधिकारियों को नोटिस, जांच के आदेश
मामले को लेकर स्मार्ट सिटी सीईओ ने प्रभारी कार्यपालन यंत्री सौरभ माहेश्वरी और उपयंत्री अभिषेक बिल्लौरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों से तीन दिन में जवाब मांगा गया है। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने भी मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और सैंपल भी लिए। अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि टेस्टिंग के दौरान पाइपलाइन से पानी बाहर निकलने की स्थिति क्यों बनी और सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए थे।
निर्माण एजेंसी को किया जा चुका है ब्लैकलिस्ट स्मार्ट सिटी क्षेत्र में पाइपलाइन और अन्य कार्यों के लिए पहले पुंगलिया नामक एजेंसी को ठेका दिया गया था। काम में देरी और गुणवत्ता को लेकर शिकायतों के बाद एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया गया। इसके बाद अधूरे कामों को पूरा कराने की जिम्मेदारी दूसरी एजेंसी को दी गई है।
फिलहाल अधिकारी इसे पाइपलाइन टेस्टिंग के दौरान डेड एंड से पानी निकलने की सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं, जबकि विपक्ष और स्थानीय लोग इसे लापरवाही बताते हुए पूरे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की गुणवत्ता और खर्च की जांच की मांग कर रहे हैं।
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Indore News: दौड़ते वाहनों के बीच अचानक सड़क फाड़कर निकला पानी, अफसर बोले- ‘टेस्टिंग सफल’


