गोण्डा। विद्युत केंद्र आर्यनगर में बिना किसी आधिकारिक स्वीकृति के विभिन्न फीडरों पर बिजली लाइनों का जाल बिछाए जाने का मामला सामने आया है। इसको लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि इस पूरे मामले में बड़े पैमाने पर अनियमितता की गई है और विभाग को नुकसान पहुंचाते हुए कुछ लोगों ने अवैध रूप से लाभ कमाया है।

मामले की शिकायत बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों तक पहुंचने के बाद विभाग में हलचल मच गई। आरोप है कि मामले में बड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच करने के बजाय एक छोटे लाइनमैन पर कार्रवाई कर पूरे प्रकरण को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
जानकारों और तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक लाइनमैन के बूते विभिन्न फीडरों पर नई विद्युत लाइनों का पूरा नेटवर्क खड़ा करना संभव नहीं है। इसके लिए विभागीय स्टोर से बड़ी मात्रा में खंभे, तार और इंसुलेटर जैसे उपकरण जारी होते हैं। ऐसे उपकरणों का निर्गमन बिना एसडीओ या अधिशासी अभियंता की अनुमति और हस्ताक्षर के संभव नहीं माना जाता है। इसके अलावा सब-स्टेशन से बिना शटडाउन और जूनियर इंजीनियर (जेई) की जानकारी के सामान्य तौर पर लाइनों का विस्तार करना भी संभव नहीं है।
उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं ने उच्चाधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत में संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने की मांग उठाई गई है।
लोगों का आरोप है कि मुख्य जिम्मेदारों को बचाकर छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की है कि आर्यनगर विद्युत केंद्र में कथित अनियमितताओं के पूरे नेटवर्क की जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक जिम्मेदारों का खुलासा हो सके और भविष्य में इस तरह की मनमानी पर रोक लगाई जा सके।
इस संबंध में SDO बृजेश कुमार ने बताया की संबंधित लाइन की जाँच की जा रही है
रिपोर्टः श्री प्रकाश शुक्ला (ब्लॉक संवाददाता, रूपईडीह)