रूपईडीह (गोण्डा)। ब्लॉक रूपईडीह की विभिन्न ग्राम पंचायतों में बनाए गए कूड़ा प्रबंधन केंद्र अपनी उपयोगिता खोते नजर आ रहे हैं। कहीं केंद्रों पर ताले लटक रहे हैं तो कहीं उनका संचालन नहीं हो रहा है। ऐसे में सरकार की स्वच्छता अभियान की मंशा पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है।

सरकार की योजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में कूड़ा प्रबंधन केंद्रों का निर्माण कराया गया था। इसका उद्देश्य गांवों से निकलने वाले कचरे को एक स्थान पर एकत्रित करना और गीले व सूखे कचरे का अलग-अलग निस्तारण करना था। गीले कचरे से जैविक खाद तैयार करने की व्यवस्था भी बनाई गई थी, ताकि गांवों की गलियों और सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी न फैले। इससे ग्रामीणों को संक्रमण, बीमारियों और गंदगी फैलाने वाले जीव-जंतुओं से बचाया जा सके।

लेकिन संबंधित कर्मचारियों की कथित लापरवाही के चलते कई ग्राम पंचायतों में ये केंद्र महज शोपीस बनकर रह गए हैं। केंद्रों का संचालन नहीं होने से सरकारी धनराशि खर्च होने के बावजूद ग्रामीणों को योजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। गांवों में कूड़ा निस्तारण की समस्या भी बनी हुई है।

इस संबंध में एडीओ पंचायत गिरिजेश पटेल ने बताया कि संबंधित ग्राम पंचायतों के कूड़ा प्रबंधन केंद्रों की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद जो भी कमियां सामने आएंगी, उन्हें दूर कराकर केंद्रों का सही ढंग से संचालन सुनिश्चित कराया जाएगा, ताकि गांवों के सार्वजनिक स्थलों और गलियों में गंदगी न फैले तथा ग्रामीणों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण मिल सके।