कानपुर। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के वीरांगना लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में आयोजित टाइम्स सम्मान समारोह में विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 15 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया। टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप की ओर से आयोजित इस समारोह में राज्यपाल ने पुलिसकर्मियों की कर्तव्यनिष्ठा, साहस और सेवा भावना की सराहना करते हुए उन्हें नशामुक्ति, शिक्षा, स्वच्छता और अन्य सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

पुलिसकर्मियों का सम्मान समाज के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक: राज्यपाल

अपने संबोधन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि यह अवसर उन कर्मयोगियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का है, जिनकी सतर्कता और तत्परता से समाज सुरक्षित रहता है। पुलिसकर्मियों के साहस से आम नागरिकों में सुरक्षा और विश्वास की भावना मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र अपने रक्षकों के योगदान का सम्मान करता है, वह अपने कर्तव्यों और मूल्यों के प्रति सच्ची निष्ठा प्रदर्शित करता है।

राज्यपाल ने कहा कि पुलिसकर्मियों का सम्मान केवल मंच पर पुष्प अर्पित करने या प्रशस्ति-पत्र देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके प्रति सम्मान, उनके परिवारों के प्रति संवेदनशीलता और उनके योगदान के लिए कृतज्ञता हमारे व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए।

पुलिसकर्मियों की बेटियों को एचपीवी टीकाकरण अभियान से जोड़ने पर जोर

राज्यपाल ने बताया कि जन भवन की पहल के तहत प्रदेश के विभिन्न जनपदों में बालिकाओं को निःशुल्क एचपीवी टीका उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस अभियान का विस्तार पुलिसकर्मियों की बेटियों तक भी किया गया है।

उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी दिन-रात जनसुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जुटे रहते हैं। ऐसे में उनके परिवारों, विशेषकर बेटियों के स्वास्थ्य की चिंता करना सामाजिक उत्तरदायित्व और उनके प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।

नशामुक्ति अभियान में पुलिस की भूमिका अहम

राज्यपाल ने पुलिसकर्मियों से नशामुक्ति अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या का असर केवल व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। पुलिसकर्मी विद्यालयों, युवाओं और स्थानीय समुदायों के बीच जागरूकता फैलाकर बच्चों को नशे से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है। पुलिसकर्मी अपनी प्रतिभा और अनुभव का उपयोग सामाजिक बदलाव लाने के लिए भी कर सकते हैं। वे स्वेच्छा से विद्यालयों में जाकर बच्चों को पढ़ाने, अनुशासन सिखाने और सामाजिक गतिविधियों में सहयोग देने का काम कर सकते हैं।

गुजरात में पुलिस व्यवस्था के सुधारों का किया उल्लेख

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान पुलिस व्यवस्था में किए गए सुधारों और सामाजिक पहलों के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि गुजरात में पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई थी, जिससे बड़ी संख्या में महिलाओं को पुलिस सेवा में आने का अवसर मिला।

उन्होंने पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के लिए बेहतर आवासीय सुविधाओं की आवश्यकता पर भी जोर दिया। राज्यपाल के अनुसार, गुजरात में पुलिस कॉलोनियों के निर्माण और मरम्मत में होने वाली देरी दूर करने के लिए विशेष प्रयास किए गए। आवासीय परिसरों में आंगनवाड़ी, पेयजल, महिलाओं के लिए गतिविधि केंद्र और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाएं विकसित करने पर भी ध्यान दिया गया।

उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से अपने अधीनस्थ कर्मचारियों और उनके परिवारों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील रहने की अपेक्षा की।

स्टूडेंट पुलिस कैडेट कार्यक्रम से बच्चों में आया सकारात्मक बदलाव

राज्यपाल ने गुजरात में संचालित स्टूडेंट पुलिस कैडेट कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके तहत विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के समूह बनाकर पुलिस के सहयोग से अनुशासन, स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रशिक्षण दिया गया।

उन्होंने कहा कि इस पहल से बच्चों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। बच्चों ने अपने परिवारों में नशे की आदत छुड़वाने और गांवों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी योगदान दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को सही दिशा और अवसर मिलने पर वे समाज में व्यापक बदलाव ला सकते हैं।

वंचित परिवारों के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा का उदाहरण

राज्यपाल ने जन भवन में संचालित विद्यालय का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां वंचित परिवारों के लगभग 450 बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में बच्चों के व्यवहार, अनुशासन और स्वच्छता से जुड़ी आदतों में चुनौतियां थीं, लेकिन लगातार प्रयासों और उचित मार्गदर्शन से उल्लेखनीय सुधार हुआ।

उन्होंने पुलिस अधिकारियों को प्रेरित किया कि वे अपनी नियमित जिम्मेदारियों के साथ शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यों में भी योगदान दें।

विश्वविद्यालयों और छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर निगरानी जरूरी

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों और छात्रावासों में उपलब्ध सुविधाओं की नियमित निगरानी पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान भोजन की गुणवत्ता, खाद्य पदार्थों की एक्सपायरी डेट, रसोई और शौचालयों की स्वच्छता, पेयजल की उपलब्धता तथा छात्रावासों में नशीले पदार्थों की संभावित मौजूदगी जैसे पहलुओं पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया जाता है।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखकर विकसित की जानी चाहिए। अलग-अलग स्थानों पर सरकारी कार्यालय होने से दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

सामाजिक सहभागिता से जरूरतमंदों की मदद का आह्वान

राज्यपाल ने जन भवन में जनसहयोग से गोसेवा के लिए आटा और गुड़ एकत्र करने की पहल का उल्लेख किया। साथ ही जरूरतमंद महिलाओं के लिए संचालित साड़ी बैंक का उदाहरण देते हुए बताया कि लगभग 50 साड़ी बैंकों का संचालन महिलाएं स्वयं जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ कर रही हैं।

उन्होंने समाज के सक्षम लोगों से जरूरतमंदों को वस्त्र और अन्य उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराने तथा जनहित के कार्यों में सहयोग देने की अपील की।

सम्मान समारोह से पुलिसकर्मियों का बढ़ेगा मनोबल

समारोह के अंत में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सम्मानित पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों का मनोबल बढ़ाते हैं और दूसरों को भी समाज तथा राष्ट्र के प्रति समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।

राज्यपाल ने पुलिसकर्मियों से अपनी नियमित जिम्मेदारियों के साथ सामाजिक सरोकारों में सक्रिय भागीदारी निभाने और सकारात्मक पहलों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।