नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए सरकार से प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा मांगा है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि दिल्ली की हवा में प्रदूषण का स्तर बेहद खराब स्थिति में पहुंच रहा है और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 तक पहुंच रहा है। ऐसे में केवल बयान देने के बजाय जमीनी स्तर पर प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

वाहनों का धुआं और ट्रैफिक जाम बड़ी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में वाहनों से निकलने वाले धुएं को वायु प्रदूषण की प्रमुख वजहों में शामिल बताया। कोर्ट ने क्षेत्र में लगने वाले ट्रैफिक जाम का भी उल्लेख करते हुए सरकार से सवाल किया कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा कि लगातार चर्चा और बयानबाजी हो रही है, लेकिन वास्तविकता यह है कि AQI पहले ही 400 के स्तर को छू रहा है। इससे प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होते हैं।

रोजाना 30 सिगरेट पीने जैसा जोखिम

दिल्ली की जहरीली हवा के खतरों को समझाने के लिए प्रदूषण के प्रभाव की तुलना रोजाना करीब 30 सिगरेट पीने से होने वाले जोखिम से किए जाने की बात भी सामने आई। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण और अन्य प्रदूषक फेफड़ों, हृदय और श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। इससे सांस और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

दीवाली पर प्रतिबंधों के साथ जागरूकता पर भी जोर

सुप्रीम कोर्ट ने दीवाली के दौरान प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए जाने वाले प्रतिबंधों पर भी विचार व्यक्त किया। कोर्ट ने कहा कि जितने अधिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे, उनके उल्लंघन की आशंका भी उतनी ही बढ़ सकती है। इसलिए केवल पाबंदियां लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों में प्रदूषण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी जरूरी है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार, प्रशासन और आम नागरिकों को मिलकर प्रभावी प्रयास करने की जरूरत है।