लखनऊ। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा से जन भवन, लखनऊ में उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जन भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने स्वतंत्रता आंदोलन में सरदार पटेल के योगदान, देशी रियासतों के एकीकरण, महात्मा गांधी एवं जवाहरलाल नेहरू के साथ उनके संबंधों तथा सामाजिक विचारों पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सरदार पटेल के जीवन, संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के जीवन चरित्र को केवल कहानियों तक सीमित रखने के बजाय प्रतियोगिताओं और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना चाहिए, ताकि युवा उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर अपने व्यक्तित्व का निर्माण कर सकें।
दृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्व क्षमता के अनुपम उदाहरण थे सरदार पटेल
राज्यपाल ने कहा कि सामान्य परिवार में जन्म लेकर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, परिश्रम, दूरदृष्टि और नेतृत्व क्षमता के बल पर देश का नेतृत्व करने तक का सफर सरदार वल्लभभाई पटेल के व्यक्तित्व की विशेषता है। स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। महात्मा गांधी के साथ मिलकर उन्होंने राष्ट्रहित में कार्य किया और स्वतंत्रता के बाद देशी रियासतों का एकीकरण कर भारत की एकता एवं अखंडता को मजबूत आधार प्रदान किया।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और विकसित भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को विकास के पथ पर आगे बढ़ाने के प्रयासों में महात्मा गांधी, सरदार पटेल और भारतीय ऋषि-मुनियों के विचारों एवं आदर्शों की प्रेरणा समाहित है।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को बताया राष्ट्रीय एकता और विकास का प्रतीक
राज्यपाल ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस परियोजना के लिए गठित समिति की अध्यक्षता उन्होंने स्वयं की थी। प्रतिमा को जनभागीदारी और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बनाने के लिए देशभर के गांवों से किसानों के कृषि उपकरणों का लोहा, मिट्टी तथा नदियों, तालाबों और समुद्रों का जल एकत्र किया गया। ग्राम प्रधानों को उनकी क्षेत्रीय भाषाओं में पत्र भेजकर इस अभियान से जोड़ा गया।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने परियोजना के निर्माण कार्य को गति प्रदान की। आज स्टैच्यू ऑफ यूनिटी केवल सरदार पटेल की स्मृति का प्रतीक नहीं, बल्कि पर्यटन, रोजगार और क्षेत्रीय विकास का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। इसके आसपास उद्यान, सड़कें और अन्य सुविधाएं विकसित होने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए सक्रिय भागीदारी जरूरी
राज्यपाल ने सरदार पटेल के सामाजिक सुधार संबंधी प्रयासों, विशेषकर दहेज प्रथा के विरोध में उनके योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समाज की कुरीतियों को समाप्त करने के लिए केवल विचार व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वयं आगे आकर सक्रिय भूमिका निभाना आवश्यक है। उन्होंने सरदार पटेल की कार्यनिष्ठा का उदाहरण देते हुए न्यायालय में मुकदमे की पैरवी के दौरान पत्नी के निधन का समाचार मिलने के बावजूद अपना कर्तव्य पूरा करने के उनके प्रसंग को भी साझा किया।
जनकल्याणकारी योजनाओं में समाज की भागीदारी पर जोर

राज्यपाल ने कहा कि समाज में अनेक व्यक्ति और संस्थाएं जनकल्याण के कार्यों में योगदान देना चाहती हैं। जरूरत है कि उनकी ऊर्जा और संसाधनों को उचित दिशा देकर विकास कार्यों से जोड़ा जाए। उन्होंने उत्तर प्रदेश में जन भवन के प्रयासों से संचालित पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि लगभग 75 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को किट वितरित की गई हैं। बालिकाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए लगभग तीन लाख टीके निःशुल्क उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं, टीबी मरीजों को पोषण एवं सहयोग देकर लगभग चार लाख मरीजों को इस बीमारी से मुक्त कराने की दिशा में कार्य किया गया है।
अधिकारियों और कर्मचारियों ने विभिन्न विषयों पर रखे विचार
कार्यक्रम में विधि परामर्शदाता सुनील कुमार वर्मा ने सरदार पटेल के गृहमंत्री के रूप में कार्यकाल और रियासतों के एकीकरण पर व्याख्यान दिया। पुनीत द्विवेदी ने धर्मांतरण के संबंध में उनके विचारों पर चर्चा की। सूचना अधिकारी कृष्ण कुमार ने सरदार पटेल और महात्मा गांधी के संबंधों पर प्रकाश डाला, जबकि प्रोग्रामर देवव्रत उपाध्याय ने महिला शिक्षा एवं सशक्तीकरण के संदर्भ में उनके विचार प्रस्तुत किए।
विनय जोशी ने सरदार पटेल और जवाहरलाल नेहरू के संबंधों पर अपने विचार रखे। अवर अभियंता प्रवीण शुक्ला ने सामाजिक भेदभाव एवं जाति प्रथा के संबंध में उनके विचारों की जानकारी दी। पीएसओ संतोष कुमार ने सरदार पटेल के जीवन वृत्त, शिक्षा और राष्ट्रीय नेतृत्व की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। वहीं, पीएसओ जमाल अहमद ने स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान और जनसंगठन की क्षमता को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के माध्यम से सरदार वल्लभभाई पटेल के राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के आदर्शों को याद करते हुए नई पीढ़ी तक उनके विचार पहुंचाने का संदेश दिया गया।