लखनऊ। एससी-एसटी एक्ट के तहत मिलने वाली राहत राशि के दावों और इसके कथित दुरुपयोग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को राहत एवं सहायता देने की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और गहन भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद जिलों में एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामलों में राहत राशि के दावों की जांच तेज की जा रही है। इसी क्रम में गाजियाबाद में पिछले करीब डेढ़ साल के दौरान 15 से अधिक मामले जांच में गलत पाए जाने की बात सामने आई है।
गाजियाबाद में 15 से अधिक मामलों में रिकवरी
अधिकारियों के अनुसार, गाजियाबाद में जांच के दौरान 15 से 16 मामलों में गलत तथ्यों अथवा कथित झूठी शिकायतों के आधार पर सहायता राशि लिए जाने की बात सामने आई।
इन मामलों में पहले दी गई राहत राशि की वापसी की कार्रवाई की गई है। कुल करीब 8.90 लाख रुपये की राशि रिकवर किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अधिकारियों के मुताबिक, अनुचित तरीके से राहत लेने वाले दावेदारों के खिलाफ आवश्यक विधिक कार्रवाई भी की जा रही है।
अप्रैल 2025 से 186 मामलों में मिली सहायता
गाजियाबाद के समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से अब तक 186 मामलों में दो करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि वितरित की गई है।
इनमें से कुछ मामलों की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के बाद राहत राशि के दावों की सत्यता को लेकर विभाग और जिला स्तरीय समितियों ने निगरानी बढ़ा दी है।
झांसी के मामले के बाद हाईकोर्ट ने दिए निर्देश
यह मामला झांसी में एक ही परिवार द्वारा कथित तौर पर अलग-अलग मामलों में लाखों रुपये की राहत राशि लिए जाने की घटना के सामने आने के बाद हाईकोर्ट के संज्ञान में आया।
इसके बाद कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के तहत मिलने वाली सहायता राशि के दावों की प्रक्रिया में सख्त मॉनिटरिंग और सत्यापन पर जोर दिया।
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद गाजियाबाद में समाज कल्याण विभाग और जिला स्तरीय समितियों ने ऐसे मामलों की जांच तेज कर दी है।
भौतिक सत्यापन पर जोर
कोर्ट के निर्देशों के बाद अब केवल दस्तावेजों के आधार पर दावों की प्रक्रिया पूरी करने के बजाय संबंधित मामलों में जमीनी स्तर पर सत्यापन को महत्वपूर्ण बनाया जा रहा है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र व्यक्ति को ही सरकारी सहायता मिले और गलत तथ्यों के आधार पर राहत राशि हासिल करने के मामलों पर रोक लगाई जा सके।
फिलहाल गाजियाबाद में चिन्हित मामलों में रिकवरी के साथ-साथ संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।


